Saheb Ko Arpan

The Real Face of Kabir

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Saheb Ko Arpan is created to invoke the Gurmukh Vani of Kabir amongst all music enthusiasts, Satsangis and Inquisitive minds.

Biography

Lt . Parkhi Saint Prabhudas Saheb Ji

Parkhi Saint

Birth: 1941

Place: Tandli, Maharashtra (India) 

Prabhudas Saheb Ji, the sage of Kabir Parakh ideology, was born in Tandali village, Badgau district, Maharashtra, in 1941.  When he was 11 years old, he resided with sage Guru Swaroop Saheb. After the demise of Guru Swaroop Saheb ji, Prabhudas Sahebji at the age of 20, lived his life churning the Kabir ideology. He used to live his life without any basis or dependencies. Satsang used to be the most interesting thing for him. He used to give the same to the attached state. He used to thoroughly understand Kabir Saheb’s “Bijak” and explain the essence to the inquisitive minds around him. That is the reason why his greatness is given a stature of sainthood. 

 

जन्म : 1941

स्थल : तांदली, महाराष्ट्र 

कबीर पारख विचारधारा के पारखी संत प्रभुदास साहेब जी का जन्म १९४१ में महाराष्ट्र के तांदली गाँव,जिल्ला : बड़गाव में हुआ था।

क़रीब ११ साल की उम्र में वे विरक्त पारखी गुरु स्वरुप साहेब जी के साथ रहे।

गुरु स्वरुप साहेब जी के देहान्त के बाद बीस साल की उम्र से वे विचरते हुए अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे।

वे अपने जीवन को बिना किसी आधार के अपने प्रारब्ध अनुसार जीते थे ।

सत्संग में उनकी मौलिक शैली रहत थी। जिज्ञासु जन के साथ सत्संग में वे अपने जीवन के अनुभवसे जुड़े सत्यको ही दर्शाते थे। कबीर साहेब का सत्योपदेश सदग्रंथ “बीजक” को परख दृष्टि से समजाते थे। इसीलिए ऐसे संतो को पारखी संत की उपमा दी जाती हैं।   

उनकी दृष्टि से सभी मनुष्य ज्ञान स्वरुप हैं और स्वतंत्र होते हुए भी अपने अध्यास एवं मान्यता के कारण ही जिव अबोध रहता हैं। ऐसा प्रभुदास साहेब जी कहा करते थे । 

वर्ण, कुल, जाती, देश, ऊँच – नीच के भेद – भावों को खंडित करते हुए सभी मनुष्य जाती को समान रूप से निष्पक्ष देखते थे।

सत्य, शील, दया, धीरज, क्षमा, संतोष, विचार, विवेक, गुरुभक्ति, वेराग्य, ज्ञान जैसे गुणो को साहेब जी मनुष्यता कहते थे ।

“कुछ लेना न देना मगन रहना” शब्द को सार्थक करते हुए मुक्त जीवन गुज़ारते हुए जीवन मुक्त पुरुष हो गए। प्रभुदास साहेब जी का देहान्त ७६ सालकी उम्र में २०१७ में हुआ । 

 

Ajaybhai

Satsangi

Birth: 09/06/1972

Place: Savarkundla, Gujarat (India)

I was about 24 years old when I met Satguru Parkhi Saint Prabhudas Saheb who was blessed to see Kabir Saheb’s words with transparency. In the 14 years I spent with him, I can say so much that it is a rarity to find a person as strong and as rhetorical as Prabhudas Saheb ji. With his wit and knowledge I was able to know the literature of Puran Saheb (Nirnay Sar), Kashi Saheb (Jad Chetan Bhed Prakash) and Kabir Saheb (Bijak). 

Due to the extent of my rites and my way of life, I could not be as liberated as I should under the light of such a man, but I was bestowed with his abundant blessings and love nevertheless. Amit and Satyaswaroop Das considered me worthy enough in contributing to spread the eternal wisdom – The credit goes to Prabhudas Saheb ji

जन्म ९//१९७२

गुजरात के अमरेलीं ज़िल्ले का तालुक़ासावरकुंडला

मेरी उम्र क़रीब २८ साल की थी जब सतगुरु पारखी संत प्रभुदास साहेब से मिलना हुआ, उनके द्वारा कबीर साहेब के शब्द को निस्पक्ष दृष्टि से देखने का अवसर मिला।

उनके साथ गुज़ारे १७ साल में इतना कह सकता हु की उनके जेसा विरक्त ओर सत्य वक्ता होना दुर्लभ हे, उनके सूजाव एवं परख से मूजे पुरण साहेब का,”निर्णय सारकाशी साहेब काजड़ चेतन भेद प्रकाशओर बंदिछोड संत सम्राट कबीर साहेब का मूल ग्रंथ  “बीजक”  जानने को मिला, जो मेरा परम सदभाग्य हे। मेरे संस्कार की सीमा एवं जीवन से लिए अध्यास के कारण में उतना मुक्त नहि हो सका जितना एसे महा पुरुष से मिलके होना चाहिए, उसे में अपना दूर भाग्य समजता हु, उनकी दया ओर प्रेम मुझे ओर उनसे मिले सबको पूर्णरूप से मिला।अमित ओर सत्यस्वरुप जी ने मुक्त जीवन के साथ सदगुणो को धरने में निमित के लिए मुजे पात्र समजा वोश्रेय प्रभुदास साहेब को जाता हैं। 

                                     

                                                                   || साहेब || 

 

satyaswaroopdasji

Satyaswaroop Das

Kabirvaani & Gurumukhvaani

Birth : 03/09/1991

M.P.A  – Master in Performing Arts ( Vocal – Gold Medalist )

Former B GRADE AIR ARTIST OF SUGAM SANGEET ( Rajkot, Gujarat, India )

Childhood began learning the discipline of music and he grew up surrounded by classical music, sugam sangeet, light music and folk music during his early days. As time progressed, his training commenced with profound Gurus in Gujarat and then moved to the esteems of Bombay, where he gained knowledge associated with singing intricacies, composition and direction of music. He grew familiar with national and international tastes of music and created albums and tracks with numerous accomplished artists in the Indian Music Industry.

“I kept drowning in the myriad depths of the music industry and getting away from the ultimate reality of human existence” .. 

Incidentally I met Ajaybhai, An amazing satsangi personality, and during this meeting, I came to know that my whole life was full of ignorance to know about Satsangi Ajaybhai’s Guru Parkhi Saint Prabhudas Saheb, the saint of Guru Kabir Parakh ideology. Hearing the video and audio of Prabhudas Saheb, I came to know the ideology of Kabir Sahib and presently myself in the wonderful journey of removing my ignorance through my ability – understanding and foresight.

 

नाम – सत्यस्वरूपदास

जन्म – ०३/०९/१९९१

M.P.A  – मास्टर इन परफोर्मिंग आर्ट्स ( गायन – गोल्ड मेडलिस्ट )

फॉर्मर B GRADE AIR ARTIST OF SUGAM SANGEET ( राजकोट, गुजरात, भारत )

संगीत के संस्कार से बचपन की शुरुआत हुई और लोकसंगीत साथ होते हुए भारतीय शास्त्रीय संगीत,सुगम संगीत, लाइट म्यूज़िक की तालीम गुजरात में विभिन्न गुरुजनो के पास शुरू हुई और संगीत का सफर आगे चलते चलते बम्बई में नामचीन गुरुजनो के पास गाने की बहुत कड़ी तालीम शुरू हुई और साथ ही गाने की बारीकियाँ, संगीत निर्देशन, (MUSIC DIRECTION) स्वरांकन (COMPOSITION) एवं देश – विदेश के संगीत के प्रकारो से परिचित होते हुए भारत के अनेक प्रसिद्ध कलाकारों के साथ गाना, बजाना और रिकॉर्डिंग किया साथही संगीत के अनेक एल्बम किये।और संगीत की गेहराइयों के समन्दर में डूबता गया और मनुष्य जीवन के वास्तविक सत्य सेदूर होता गया।

संयोग से एक अदभुत सत्संगी व्यक्तित्व अजयभाई से मुलाकात हुई और इस मुलाकात के दौरान मैंने जाना की मेरा पूरा जीवन अज्ञानता से भरा हुआ था वो परखने को मिला और अपना अज्ञान दूर कैसे किया जाए वो जानने को मिला। और आगे सत्संग का दौर चलता रहा फिर जाना मनुष्य जीवन का उदेश्य क्या हैं ? मनुष्य जीवन क्यों मिला ? में कौन हूँ ? कहा से आया ? क्या कर रहा हूँ ? जीवन क्यों मिला ? मेरा स्वरुप क्या हैं ? बंधन और मुक्ति क्या हैं ? जड़ चेतन भेद क्या हैं ? ऐसे कई मनुष्य जीवन से जुड़े प्रश्न और उनके उत्तर सत्संग के माध्यम से जाना वही अनुभव में लेता जा रहा हूँ।  सत्संगी अजयभाई के गुरु कबीर पारख विचारधारा के पारखी संत प्रभुदास साहेब के बारे में जाना।  प्रभुदास साहेब के वीडियो एवं ऑडियो सुनके कबीर साहेब की विचारधारा को जाना और वर्तमान में अपने आप को मेरी क्षमता-समज और पूर्वसंस्कार के माध्यमसे अपना अज्ञान दूरकरने की अदभुतयात्रा में निकलाहूँ

Amit Dhorda

Traditonal Folk & Kabir Vaani

Born – 25th Oct , 1999

City – Rajkot , Gujarat ( India )

Home Town – Savarkundla , Gujarat ( India )

Love For Music 

When I was at the age of 8, I use to sing some melodious folk creations and at the age of 10 I started giving live shows with a complete musical band. Further I got training in classical music from Guru Shree Aatamohmmand Khan Pathan ji. Folk music is in my hereditary. The reason why I got attached to gujarati folk music is it’s richness, Gujarati folk is the richest folk which I liked most to sing. Folk word derives from the german word ” volk ” which means the group of people expressing their feelings (Sensation) in their regional language  From my point of view folk music is an expression of real life of the people . 

Combination Of Gujarati Folk With Kabir Vaani 

Whenever I sing ” Maarmik Vaani ” I feel too close to myself , I just love to sing bhajans of Gangasati, Saint Gorakh, Saint Das Satar, Kavi Shree Dula Bhaya Kaag, Meghani ji and many more. I found the seed of truth in this bhajans , the real side of truth. I further researched about saint kabir but I didn’t  found the right side of Saint kabir ,there are many Kabir Panths who presented kabir in all different ways . I wondered many kabir ashrams in india to find the real face of kabir, but all have their different thoughts for kabir. Parkhi Saint Prabhudas Saheb was guru of my father, he presented the real side of truth and I got inspired to spread kabir’s truth through the medium of folk music .

 

 

जन्म – २५ अक्टूबर, १९९९

शहर – राजकोट, गुजरात (भारत)

होमटाउन – सावरकुंडला, गुजरात (भारत)

संगीत का आकर्षण

जब मैं 8 साल की उम्र का था, तब मैं कुछ गुजराती लोकसंगीत की मधुर रचनाए गाने की कोशिश करता रहता था और 10 साल की उम्र में मैंने एक पूर्ण संगीत बैंड के साथ लाइव कार्यक्रम देना शुरू कर दिया मैंने गुरु श्री आतमोहम्मानंद खान पठान जी से भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षण प्राप्त किया। लोक संगीत मेरे वंशानुगत में है। इसी कारन मुझे लोक संगीत से लगाव है। गुजराती लोकसंगीत सबसे समृद्ध लोक है जिसे मुझे गाना सबसे ज्यादा पसंद है। लोक शब्द जर्मन शब्द “वोल्क” से आया है, जिसका अर्थ मेरी दृष्टि से यह हैं की, जब संवेदना जो अपने ही निज अनुभूति से निकली हो और उसी अनुभूति को संगीत का माध्यम देके प्रांतीय भाषा के अनुसार लोक शैली में प्रस्तुत की जाए वो लोकसंगीत का आकर बन जाता हैं।

कबीर वाणी के साथ गुजराती लोक का संयोजन

जब भी मैं “मर्मिक वाणी” गाता हूं तो मैं अपने आप को बहुत करीब महसूस करता हूं, मुझे गंगासती, संत गोरख, संत दास सतार, कवि श्री दुल्ला भाया काग, झवेरचंद मेघाणी जी और कई संत, कवी के भजन गाने का शौक है। मुझे इस भजनों में सत्य का बीज मिला । मैंने संत कबीर के बारे में रिसर्च किया लेकिन मुझे संत कबीर का सही रूप कही नहीं मिला, ऐसे कई कबीर पंथ हैं जिन्होंने अलग-अलग तरीकों से कबीर को प्रस्तुत किया हैं । काबीर के असली चेहरे को खोजने के लिए में भारत के कई कबीर आश्रमों में गया, लेकिन सभी ने कबीर के लिए अपने अलग विचार रखे । पारखी संत प्रभुदास साहेब जो मेरे पिता के गुरु थे, उन्होंने कबीर वास्तविक स्वरुप प्रस्तुत किया जो कबीर साहेब जी के मुखबाल सद्ग्रन्थ बिजक में कबीर साहेब खुद ने ही अपने विचार प्रस्तुत किये और मुझे लोक संगीत के माध्यम से कबीर के सत्य को उजागर की प्रेरणा मिली।

Our Motive

Saheb Ko Arpan is created to invoke the Gurmukh Vani of Kabir amongst all music enthusiasts, Satsangis and Inquisitive minds.

Why Saheb Ko Arpan

There are several platforms and artists showcasing the idea of Kabir and his words in the form of music and art – However, a majority of them haven’t touched the right essence of what Kabir had to say. This platform is built with an objective to spread the true message of Kabir Saheb.